Friday, 27 September 2024

जरुरत या जरुरी

 जरुरत या जरुरी ?

आवश्यक सूचना: यह कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, परन्तु इसका लेखक के व्यक्तिगत जीवन से किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसमें उल्लेखित नाम और पात्र पूर्णतः काल्पनिक हैं। यदि किसी भी नाम या घटना की समानता वास्तविक जीवन से प्रतीत होती है, तो वह मात्र एक संयोग होगा। कहानी का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। अब बिना किसी देरी के, आप खुद ही पढ़ें और अनुभव करेंजो होना होगा, देखा जाएगा। 

जरुरत या जरुरी सुनने में तो ये दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन असल में इनका मतलब थोड़ा अलग है। आखिर इनमें ऐसा क्या फर्क है? सोचिये ....अच्छा मैं आपका समय थोड़ी सा बचाता हूँ और फर्क समझाता हूँ। फर्क छोटा है, पर समझने लायक है। चलिए, मैं आपको एक उदाहरण देकर समझाता हूँ। अगर ठंड है तो गर्म कपड़े पहनने की जरूरत होतीहै। (कपड़ेचाहिए।) ठंड में गर्म कपड़े पहनना जरूरी है। (कपड़े पहनना महत्वपूर्ण है।) अब आपको "जरूरत" और "जरूरी" के बीच का फर्क समझ गया होगा। जरूरत उस चीज़ की होती है जो हमें चाहिए, और जरूरी वो होता है जो करना या पाना बहुत महत्वपूर्ण है।

        जिंदगी में हम अक्सर सोचते हैं कि जो चीज़ हमें चाहिए, वो जरूरी भी है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। जरुरत  यानी जो चीज़ हमें चाहिए, और जरुरी यानी जो चीज़ हमारे लिए महत्वपूर्ण या अनिवार्य है। अब मैं कुछ और कहूँ इससे पहले कुछ पंक्तियाँ, गलतियों से भरी ये किताब जिंदगी की, हर पल कोई नया सबक सिखाती  है।  जरूरत और जरुरी का फर्क भी तो जिंदगी में की गलतियों से समझ आती हैं।  अब वो सबक क्या था ? ये हमें मोहित की जिंदगी की एक घटना से पता चलता है तो ये कहानी मोहित उसकी दोस्त मानवी और मानसी के बीच की है। अब चलिए और पहेलियाँ बुझाते हुए सीधा उस सबक पर आते हैं।  

        मोहित एक साधारण सा लड़का था। उसका स्वभाव बहुत ही मददगार और मिलनसार था। उसकी दो खास दोस्त थीं - मानसी  और मानवी। मानसी  हमेशा से मोहित की बहुत अच्छी दोस्त रही थी, हर अच्छे-बुरे वक्त में साथ देने वाली। वहीं, मानवी सिर्फ उसकी क्लासमेट थी, जिससे ज़्यादा बातचीत नहीं होती थी।

एक दिन मानवी का उसके बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया। इस घटना के बाद वह अचानक से मोहित के करीब गई। उसने अपनी भावनाएं मोहित से साझा करनी शुरू कर दीं। मोहित ने सोचा कि मानवी मुश्किल वक्त से गुजर रही है और उसे सहारे की ज़रूरत है। उसने एक अच्छे दोस्त की तरह उसका साथ दिया, उसे सुनना शुरू किया, उसकी भावनाओं का सम्मान किया।

वक़्त के साथ मानवी की ज़िंदगी में थोड़ा बदलाव आया। उसने धीरे-धीरे अपनी पुरानी तकलीफों से बाहर आना शुरू किया, पहले से बेहतर दिखने लगी। मोहित को लगा कि मानवी अब अपने जीवन में आगे बढ़ रही है, और उसने राहत की सांस ली कि उसने उसकी मदद की। लेकिन एक दिन, मोहित ने अचानक मानवी को उसके पुराने बॉयफ्रेंड के साथ देखा। वह हैरान रह गया, क्योंकि उसने सोचा था कि मानवी उस रिश्ते से बाहर चुकी है। उस पल, मोहित को अपनी दोस्त मानसी  की वो बात याद आई, जो उसने एक बार उसे समझाई थी

ज़रूरत और ज़रूरी में फर्क समझना आना चाहिए। हर कोई तुम्हारी ज़रूरत के वक्त तुम्हारे पास आता है, पर वो तुम्हारी ज़िंदगी में ज़रूरी हो, ये ज़रूरी नहीं।

मोहित को एहसास हुआ कि मानवी को बस उस वक्त सहारे की ज़रूरत थी, और उसने उसे एक ज़रूरी दोस्त मान लिया था। पर असलियत यह थी कि मानवी ने उसे सिर्फ एक वक़्ती सहारा समझा था। मोहित ने अब समझ लिया था कि ज़रूरत और ज़रूरी में फर्क करना कितना अहम है। ज़रूरतें अक्सर वक़्त के साथ बदल जाती हैं, पर जो लोग ज़रूरी होते हैं, वो हमेशा हमारे साथ रहते हैं।

इस अनुभव ने मोहित को एक नई सीख दी - सभी लोग हमारी ज़िंदगी में आते हैं, लेकिन हर कोई ज़रूरी नहीं होता। अब मोहित को तो अपना सबक मिल गया पर आप भी अपनी जिंदगी की व्यस्त शामों में से थोड़ा सा समय निकालकर, कभी अपने आराम में थोड़ा सा खलल डालकर ज़रूर सोचिएगा, "कि ज़रूरतें पूरी होते ही लोग बदल जाते हैं, या शायद वो कभी ज़रूरी थे ही नहीं।" सोचिए, आपके जीवन में कौन ज़रूरी है और कौन सिर्फ एक ज़रूरत?” इससे पहले की आप भी न जाये अगले मोहित। ......        

 

                                      



 

 

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