Saturday, 26 December 2020

इजहार- ए- इश्क

 इजहार- ए- इश्क किया था हमने भी,
इश्क एक ढोंग है कहा था उसने भी
इश्क हो तुझे भी किसी से खुदा करे,
फिर कोई तुझे उससे जुदा भी करे,
फिर तू गली गली फिरा करे
और फिर तू यूं उसे तस्बियों में पढ़ा करे,
और फ़िर एक रोज हम मिले किसी मोड़
पर और फ़िर मैं कहूं इश्क एक ढोंग है..
और तू फ़िर नहीं नहीं कहा करे ......
फ़िर मैं कहूं कि तू फ़िर एक झूठ है
और फ़िर तू अपने किए पर अफसोस करे....


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