शीर्षक पढ़ने में अजीब है पर पढ़ते पढ़ते आप समझ जायेंगे, इस लेख में प्रयोग किये गए .पात्र, स्थान काल्पनिक हैं उनका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं हैं। अगर फिर भी कोई सम्बन्ध निकल जाता है तो वो एक अद्भुत संयोग होगा और उसके लिए लेखक की कोई जवाबदेही नहीं होगी। इस लेख में साझा किये गए सारे विचार लेखक के नहीं हैं, तो संभव हैँ , आप कुछ बातों से सहमत न हों और आपको कुछ बात बुरी लगे अगर ऐसा हो तो उसके लिए क्षमा माँगता हूँ , और किसी भी प्रकार की त्रुटि को ध्यान न देकर केवल लेख पढ़ें।
मैं यह हमेशा सोचता हूँ इस संसार की रचना करने वाले परमात्मा ने जब मनुष्य बनाये, और उस मनुष्य को इतनी सारी चीज़ों से क्यों बांध दिया जैसे रिश्ते-नाते, समस्या , दुःख -दर्द -पीड़ा, और इन सबसे मनुष्य को जो उसे हमेशा साथ रहे तो फिर उसने शायद एक ऐसा सम्बन्ध बनाया जो हमारे लिए इन सबसे ऊपर है क्योंकि हम किसी को यूँ ही बेस्ट नहीं कहते, पर मित्र को कह देते हैं। मित्र है ही ऐसा उसे हमारी सब बात पता होती है. पर मित्र भी तो कई तरह के होते हैं न जैसे की साथ पढ़ने वाला , साथ स्कूल कॉलेज में तो ऐसे कई बन जाते हैं न , हम जहाँ वर्क करते हैं वहां काम करने वाला भी तो हमारा मित्र ही होता है, है हम सबसे हर बात नहीं साझा करते पर होते तो मित्र ही हैं।
इंसान
सम्बन्ध इस उम्मीद से
ही बनाता है , ताक़ि वो अपने सुख
दुःख उसके साथ साझा कर सके , उसे
पता होता है वो जिससे
भी अपनी पीड़ा, कमजोरी बता रहा है, वह उसे समझेगा
और उसके पीछे उसकी कमजोरी का मजाक नहीं
बनाएगा। अब आप ये
सोचिये की अगर आपको
यह पता चल जाये कि
आप जिसके साथ अपनी समस्या बता रहे हैं वो उसी बात
को अपने मित्र के साथ बता
कर वो आपका मजाक बना रहा है , ये बात मुझे
भी अटपटी लगी तो आपको भी
लगेगी आप कहेंगे हम
ऐसा क्यों करेंगे क्यों हम किसी ऐसे
से अपनी बात शेयर करेंगे जो हमारे पीछे
हमारा मजाक बनाये। अब
मैं अगर ऐसा कह रहा हूँ
तो निश्चित ही मेरा कुछ
अनुभव होगा जिसके आधार में मैंने यह कहा, और
वही अनुभव मैं आपसे साझा कर रहा हूँ
।
मैं
रोज की तरह ऑफिस का सारा काम करके निकल ही रहा था तभी मुझे कुछ भूख सी लगी, अचानक से
पीछे से किसी ने आवाज लगायी , मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो कोमल थी ,कोमल ने रुकने को
कहा वो पास आयी और कहा उसे भी भूख लगी है और
फिर हम ऑफिस के सामने राजू भैया के मोमोस को देख कर उनकी शॉप की तरफ अपने आप ही बढ़
चले , हम जब वहां पहुंचे तो देखे
आज भैया की दुकान में कम लोग थे, हमने मोमोस आर्डर किये और वहीँ अंदर बैठ गए। हमारे बाजु वाली तरफ 3 लोग का समूह था उनमे 2 लड़की और एक लड़का देखने में
तीनों काफी अच्छे मित्र लग रहे थे। मैंने देखा लड़का उन दो लड़कियों से कुछ बता रहा था
उसकी चेहरे के भाव और आँखों से लगा वो काफी दुखी था और बहुत भरी मन से बता रहा हो वो
लड़कियाँ उसकी बात सुनी उसे समझायी मुझे देख कर अच्छा लगा की चलो मित्र हों तो ऐसे वरना..ये
सोच कर मैं हल्का मुस्कुराया और फिर मोमोस का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर में मोमोस
आ गए और फिर हम दोनों ने खाना शुरू किया अभी दो ही मोमोस खाये थे मैंने जैसे नजर अपने बायीं तरफ की देखा लड़का
जा चुका था सिर्फ लड़कियाँ थी तो फिर मैं मोमोस खाने लगा।
मेरे मोमोस खत्म ही हुए थे अभी की बाजु से मुझे जोर
से हॅंसने की आवाज आयी ये मैंने देखा तो पाया की वो लड़कियां अपनी किसी मित्र से फोन
में बात करके उसी लड़के की बात का जिक्र करके हंस रही थी और उस बेचारे लड़के का मजाक
बना रही थी मेरा मन अब थोड़ी सा भारी हो गया और उस लड़के के लिए दुःख हुआ की उसने इनको
अपनी परेशानी बता कर गलती कर दी। उसने तो अपना ही समझ कर बताया था अब उसे कहाँ पता
था की वह मजाक का पत्र बन जाएगा।
मेरी
राय अब बदल गयी थी और एक बार मैंने खुद को भाग्यशाली समझा क्योंकि मेरे मित्र कम हैं
और मुझे पता है किनसे कौन सी बात बतानी है और नहीं , और कुछ बात इंसान सारी उम्र अपने
दिल के किसी कोने में ही दबा कर रखता है शायद यही वजह होगी पुरुषों के हार्ट अटैक से
मरने की। मैं यह सब सोच ही रहा था की तभी कोमल ने मेरे इस विचारो के कौतूहल को बंद
करते हुए कहा अब चलें या यहीं रुकना है आज , मैंने भी उसे एक बार देखा और उ
से हाँ में
जवाब देते हुए चल दिया।
अब
कहने को तो मैं चल दिया कोमल के कहने पर मेरे मन में वही सब घूम रहा था बार बार उस
लड़के का वो रुआंसा सा चेहरा ही घूम रहा था , और उन लड़कियों का उसकी बातों का मजाक बनाना
और उनकी वो हंसी दिल को किसी काँटे की तरह चुभ रही थी. मैंने कोमल को घर ड्राप करके
आ गया, घर आते ही माँ ने हाथ धोने को खा और चाय लायी चाय सामने थी पर मन नहीं था पर
फिर भी चाय की एक चुस्की ली और सोचा सही कहते हैं लोग की हर मित्र, मित्र नहीं होता
, क्योंकि उनके भी अपने मित्र होते हैं और जैसे आप अपने मित्रों के साथ किसी का जिक्र
करके हँसते हैं , ठीक उसी तरह आप भी किसी दोस्तों के बीच कभी न कभी मजाक का पात्र बन
जाते हैं।
अंत में मैं बस यही कहना चाहूँगा, कि हमें मित्र बनाते समय थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए, और यह भी ध्यान रखें आपकी आपसी चर्चा में किसी की किसी भी भावना को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आघात न हो। मुझे विश्वास है आप अगर यहाँ तक पढ़ लिए हो तो आपको इसका शीर्षक अब सही लगा होगा जो मैंने कहा था कि , " हर दोस्त , दोस्त नहीं होता, क्योंकि हर दोस्त के भी अपने दोस्त होते हैं।"

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